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देश की बटवारा के लिए सरदार बल्लभ भाई पटेल के किरदार (भूमिका ) से संघ परिवार की अनदेखी !

Posted on 28th Feb 2014 01:05:58

आरिफ अजीज...........( भोपाल ) संघ परिवार और हिन्दुस्तान की तकसीम (बंटवारा )का जिम्मेदार मोहम्मद अली जिन्नाह और मुसलमानों को करार देता रहा है , हालाकि हकीकत ये है कि जिन्नाह की की जिंदगी का बड़ा हिस्सा कौम परस्तों (देश भगतों ) के साथ गुजरा , अगर कांग्रेस की कयादत , उनके साथ बराबरी की सलूक करती तो वह कभी देश की बंटवारा का नारा नहीं लगाते जिन्नाह की 1947 में की गई जिस तकरीर ( भाषण ) का आज हवाला दिया जाता है ।उससे तीस साल पहले 1917 में उन्होंने अपना नोक्ताए नजरिया ( स्टैंड ) क्लियर कर दिया था , वह ब्रिटिश पार्लियामेंट की मोकर्र ( नियुक्त )की गयी पारलिमानी कमिटी (सेंट्रल कमिटी ) के सामने गवाही दे रहे थे , एक सवाल के जवाब में उन्होंने वाजेह अल्फाज अथवा साफ़ लफ्जों था कि " मैं एक हिंदुस्तानी कौम परस्त ( देश भक्त ) की हैसियत से कहना चाहूँगा के जितनी जल्द मुमकिन हो उतनी सर'अत से हमें हिन्दू और मुसलमानों के बीच इख्तेलाफ ( मतभेद ) ख़त्म करना चाहिए , वह दिन जब आएगा तो मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा " । जिन्नाह की सेक्युलर फ़िक्र व नजर ( सेक्युलर सोंच ) की इससे बेहतर मिशाल और क्या हो सकती है जो अनासिर ( तत्य ) मुल्क की तक्सीम का मुजरीम मुसलमानों और जिन्नाह को साबीत करते रहे हैं , उन्हें मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की खुद्नोश्त सेवांह " इंडिया विन्स फ्रीडम " के गैर्मत्बुआ औराक़ में जाहिर की गई उस राय पर भी तवज्जो ( ध्यान ) देना चाहिए जिस में दो टूक अलफ़ाज़ में उन्होंने बतया था कि हिंदुस्तान की बंटवारा के लिए जिन्नाह से जेयादा सरदार पटेल और जवाहर लाल नेहरु जिम्मेदार थे , संघ परिवार और बाज नाम नेहाद तरक्की पशंदों ( कथित प्रगतिशील लोगों ) जिन्नाह और मुसलमानों के मफ्रुजा जुर्म मबनी (आधारित ) जो चार्जशीट तैयार कर रख्खी थी मौलाना आज़ाद की कलम ने धज्जियां उड़ा दी , संघ लोगों का ये भी कहना है कि मुसलामानों ने दो कौमी नजरिया ( two nation policy ) को कबूल करके अपने लिए जिस जुदागाना वतन का मुतालेबा किया था , वह उन्हें पाकिस्तान की हैसियत से मिल गया , अब आज़ाद हिन्दुस्तान में उनका न कोई हक है और न हिस्सा , लिहाज़ा मुसलमानों को यहाँ उनके रहमों करम पर रह कर दुसरे दर्ज़ा की शहरी की जिंदगी गुजारनी चाहिए.

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