तनख़्वाह (पैसों) को महीने की आख़िरी तारीख़ तक बचाने का नुस्ख़ा!


Posted on 4th Jan 2017 19:28:34

तनख़्वाह (पैसों) को महीने की आख़िरी तारीख़ तक बचाने का नुस्ख़ा

 

ये वाक़िया एक अरबी नौजवान का है, ये अपनी ज़िंदगी से खुश नहीं था, उस की तनख़्वाह सिर्फ चार हज़ार रीयाल थी, शादीशुदा होने की वजह से उस का खर्चा उस की तनख़्वाह से कहीं ज़्यादा था, महीना ख़त्म होने से पहले ही उस की तनख़्वाह ख़त्म हो जाती और उसे क़र्ज़ लेना पड़ता, यूं वो आहिस्ता-आहिस्ता कर्ज़ों की दलदल में डूबता जा रहा था, और उस का यक़ीन बनता जा रहा था कि अब उस की ज़िंदगी इसी हाल में ही गुज़रेगी, बावजूद ये के उस की बीवी उसके माली हालत का ख़्याल करती, लेकिन कर्ज़ों के बोजे में तो सांस लेना भी दुशवार होता है.

एक दिन वो अपने दोस्तों में मजलिस में गया, वहां उस दिन एक ऐसा दोस्त भी मौजूद था जो साहिबे राय आदमी था और इस नौजवान का कहना था कि मैं अपने इस दोस्त के मशवरों को क़दर की निगाह से देखता था,कहने लगा मैंने उसे बातों बातों में अपनी कहानी कह सुनाई और अपनी माली मुशकिल उस के सामने रखी, उसने मेरी बात सुनी और कहा कि मेरी राय ये है कि तुम अपनी तनख़्वाह में से कुछ हिस्सा सदक़ा के लिए खास करो, इस अरबी नौजवान ने हैरत से कहा : जनाब मुझे घर के खर्चे पूरे करने लिए कर्जे़ लेने पड़ते हैं और आप सदक़ा निकालने का कह रहे हैं?

 

ख़ैर मैंने घर आकर अपनी बीवी को सारी बात बताई तो बीवी कहने लगी: तजुर्बा करने में क्या हर्ज है?

हो सकता है अल्लाह पाक तुम पर रिज़्क़ के दरवाज़े खोल दे। कहता है मैंने हर महीने 4 हज़ार रीयाल में से 30 रीयाल सदक़ा के लिए ख़ास करने का इरादा किया और महीने के आख़िर में उसे अदा करना शुरू कर दिया.!

سبحان الله

 क़सम खा कर कहता हूँ मेरी तो हालत ही बदल गई, कहाँ मैं हर वक़त माली टेंशनो में और सोचों में रहता था और कहाँ अब मेरी ज़िंदगी गोया फुल हो गई थी, हल्की फुलकी आसान, कर्ज़ों के बावजूद मैं ख़ुद को आज़ाद महसूस करता था एक ऐसा ज़हनी सुकून था कि क्या बताउं. फिर कुछ महीनो बाद मैंने अपनी ज़िंदगी को सेट करना शुरू किया, अपनी तनख़्वाह को हिस्सों में तक़सीम किया , और यूं ऐसी बरकत हुई जैसे पहले कभी नही हुई थी. मैंने हिसाब लगा लिया और मजेए अंदाज़ा हो गया कि कितनी मुद्दत में إن شاء الله कर्ज़ों के बोजे से मेरी जान छुट जाएगी. फिर अल्लाह جل شانه ने एक और रास्ता खोला और मैंने अपने एक अज़ीज़ के साथ उस के प्रॉपर्टी डीलिंग के काम में हिस्सा लेना शुरू किया, में उसे गाहक ला कर देता और इस पर मुझे मुनासिब प्रॉफिट हासिल होता. الحمد لله

 ! में जब भी किसी गाहक के पास जाता वो मुझे किसी दूसरे तक राहनुमाई ज़रूर करता मैं यहां पर भी वही अमल दोहराता कि मुझे जब भी प्रॉफिट मिलता में इस में से अल्लाह के लिए सदक़ा ज़रूर निकालता.

 

अल्लाह की क़सम सदक़ा किया है? कोई नहीं जानता सिवाए उस के जिसने उसे आज़माया हो. सदक़ा करो, और सब्र से चलो , अल्लाह का फ़ज़ल से ख़ैर-ओ-बरकतें अपनी आँखों से बरसते देखोगे.

 

नोट : १. जब आप किसी मुस्लमान को तनख़्वाह में से सदक़ा के लिए रक़म मुख़तस करने का कहेंगे और वो इस पर अमल करेगा तो आपको भी इतना ही अज्र मिलेगा जितना सदक़ा करने वाले को मिलेगा, और सदक़ा देने वाले के अज्र में कोई कमी वाक़ेअ नहीं होगी, सोचीए !!! आप इस दुनिया से चले जाऐंगे और आपके सबब आपके पीछे कोई सदक़ा कर रहा होगा

 

२: ऐसे ही अगर आपने ये मेसेज आगे शेर किया और किसी ने सदक़ा देने का मामूल बना लिया आप के लिए भी सदक़ा देने वाले के मिसल अजर हे.

मेरे अज़ीज़! अगरचे आप की आमदनी कम हैं। और आपको लगा बंधा वज़ीफ़ा मिलता है तब भी आप थोडा बहुत जितना हो जाये कुछ  रक़म सदक़ा के लिए ज़रूर मुख़तस करें. अगर सदक़ा करने वाला जान ले और समजे ले कि इस का सदक़ा अदा करने से पहले अल्लाह पाक की बारगाह में क़बूल हो जाता है तो यक़ीनन देने वाले को लज़्ज़त लेने वाले से कहीं ज़्यादा होगी.

 

क्या आप को सदक़ा के फ़वाइद मालूम हैं?

खासतौर पर 17, 18, 19 को तवज्जो से पढियेगा

 

सुन लो ! सदक़ा देने वाले भी और जो इस का सबब बनते हैं वो भी!

१: सदक़ा जन्नत के दरवाज़ों में से एक दरवाज़ा है

२: सदक़ा नेक आमाल मैं अफ़ज़ल अमल है , और सबसे अफ़ज़ल सदक़ा खाना खिलाना है.

३: सदक़ा क़ियामत के दिन साया होगा, और अपने देने वाले को आग से ख़लासी दिलाएगा

४: सदक़ा अल्लाह तआला के ग़ज़ब को ठंडा करता है, और क़ब्र की गर्मी की ठंडक का सामान है

५: मय्यत के लिए बेहतरीन हदया और सबसे ज़्यादा नफ़ा बख़श चीज़ सदक़ा है, और सदक़ा के सवाब को अल्लाह-तआला बढाता रहता हैं

६:  सदक़ा मुसफ़्फ़ी (पाक करने वाला है) है, नफ़स की पाकी का ज़रीया और नेकियों को बढाता है

७:  सदक़ा क़ियामत के दिन सदक़ा करने वाले के चेहरे का सुरूर और ताज़गी का सबब है

८: सदक़ा क़ियामत की होलनाकी के ख़ौफ़ से अमान है , और गुज़रे हुए पर अफ़सोस नहीं होने देता.

९: सदक़ा गुनाहों की मग़फ़िरत का सबब और बुराइयों का कफ़्फ़ारा है.

१०: सदक़ा ख़ुशख़बरी है हुस्न ख़ातमा की , और फ़रिश्तों की दुआ का सबब है

११: सदक़ा देने वाला बेहतरीन लोगों में से है , और इस का सवाब हर उस शख़्स को मिलता है जो इस में किसी तौर पर भी शरीक हो.

१२: सदक़ा देने वाले से ख़ैरे कसीर और बड़े अज्र का वादा है

१३: ख़र्च करना आदमी को मुत्तक़ीन की सफ़ में शामिल कर देता है, और सदक़ा करने वाले से अल्लाह की मख़लूक़ महब्बत करती है.

१४: सदक़ा करना जूद-ओ-करम और सख़ावत की अलामत है

१५: सदक़ा दुआओं के क़बूल होने और मुश्किलों से निकालने का ज़रीया है

१६ सदक़ा बला-ओ-मुसीबत को दूर करता है , और दुनिया में सत्तर 70 दरवाज़े बुराई के बंद करता है

१७: सदक़ा उम्र में और माल में इज़ाफे़ का सबब है.कामयाबी और रिज़्क़ का सबब है.

१८: सदक़ा ईलाज भी है दवाई भी और शिफ़ा भी...

१९: सदक़ा आग से जलने, ग़र्क़ होने , चोरी और बुरी मौत को रोकता है

२०: सदक़ा का अज्र मिलता है , चाहे जानवरों और परिंदों पर ही क्यों नाहो..

आख़िरी बात : बेहतरीन सदक़ा इस वक़्त ये है कि आप इस मैसिज को सदक़ा की नीयत से आगे नशर कर दे

 

Recent Posts


Catgories


Archives


FOLLOW US ON....

Copyrights © 2015 Biharbroadcasting.com All rights reserved | Developed by Miracle Valley Software solution