नागरिकता, जन्मतिथि से इनकार, तो आख़िर किस बात का प्रमाण है आधार? देश में आज कल लगभग हर सेवा में आधार कार्ड मांगा जाता है, लेकिन सरकार और यूआईडीएआई बार-बार स्पष्ट करते रहे हैं कि यह जन्मतिथि, नागरिकता या कई मामलों में पते का अंतिम प्रमाण नहीं है. ऐसे में सवाल उठता है कि आख़िर आधार की क़ानूनी और व्यावहारिक हैसियत क्या है? द वायर स्टाफ 29/04/2026 भारत / विशेष राज्य नागरिक से कहता है कि योजनाओं, सेवाओं और वित्तीय लेन-देन के लिए आधार दें; लेकिन जब अधिकार, उम्र, नागरिकता या वैधता का सवाल आता है, तब कहा जाता है कि आधार पर्याप्त प्रमाण नहीं है. (फोटो साभार: BMN Network/Flickr, CC BY-2.0.) नई दिल्ली: भारत में ‘आधार’ संख्या आज लगभग हर नागरिक के जीवन का हिस्सा बन चुकी है. बैंक खाता खुलवाने से लेकर मोबाइल सिम लेने, राशन पाने, टैक्स रिटर्न भरने, पेंशन लेने, छात्रवृत्ति पाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक आधार की मांग आम बात है. लेकिन दूसरी तरफ, समय-समय पर सरकार, अदालतें, विभागीय संस्थाएं और खुद भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) यह स्पष्ट करते रहे हैं कि आधा...
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