देश की राजधानी दिल्ली में होली के मौके पर 5 हत्याएं होती है मगर सारा विवाद केवल एक जगह तक सीमित है! उत्तम नगर में आपसी लड़ाई के बाद तरुण के मर्डर के बाद जैसे वहां पर मामला साम्प्रदायिक हुआ है, मुस्लिम आरोपियों के घरों को भीड़ द्वारा जलाने के बाद प्रशासन का बुलडोज़र भी चल जाता है! मगर सवाल ये है कि अगर मर्डर के लिए यही पैमाना है तो बाकी जगह सन्नाटा क्यों पसरा है? 🔻दिल्ली के ही पालम में पुनीत यादव को होली की रात 8 से 10 लोगों के गिरोह द्वारा चाकू मार के मार दिया जाता है और पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर है। 🔻ऐसे ही दिल्ली के कराला में एक टैक्सी ड्राइवर विकास शर्मा की दो लोगों द्वारा बेरहमी से चाकू मार के हत्या कर दी जाती है मगर न्याय और बुलडोज़र नदारद है! 🔻दिल्ली के ही बलजीत नगर में होली वाले दिन घर के बाहर शराब पीने को लेकर विजय उपाध्याय की हत्या कर दी जाती है मगर यहां भी बुलडोज़र जस्टिस नहीं देखने को मिलता है। 🔻ऐसे ही बुराड़ी में आपसी लड़ाई में एक 20 वर्षीय लड़के की चाकू मार के हत्या कर दी जाती है मगर न्याय नाम पर सन्नाटा पसरा है। अब...
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